पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य
संदर्भ
- हाल ही में नमूना पंजीकरण सर्वेक्षण 2024 भारत के महापंजीयक कार्यालय (ORGI) द्वारा जारी किया गया।
नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS)
- यह शिशु मृत्यु दर, जन्म दर, मृत्यु दर तथा अन्य प्रजनन एवं मृत्यु दर संकेतकों के राष्ट्रीय एवं उप-राष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीय वार्षिक अनुमान प्रदान करती है।
- यह एक बड़े पैमाने पर जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण है, जिसे भारत के महापंजीयक कार्यालय द्वारा प्रतिवर्ष सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित किया जाता है।
प्रमुख निष्कर्ष
- जन्म दर: प्रति 1,000 जनसंख्या पर जीवित जन्म। यह 2014 में 21 से घटकर 2024 में 18.3 हो गई।
- शहरी क्षेत्रों में 14.9 से घटकर 14.7 और ग्रामीण क्षेत्रों में 20.3 से घटकर 20.2।
- बिहार में सर्वाधिक जन्म दर 26.8 रही, जबकि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में न्यूनतम 9.9।
- मृत्यु दर: प्रति 1,000 जनसंख्या पर मृत्यु। यह 6.7 से घटकर 6.4 हो गई।
- 2024 में छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक मृत्यु दर 8.4 रही, जबकि चंडीगढ़ में न्यूनतम 3.9।
- शिशु मृत्यु दर (IMR): एक वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर मृत्यु।
- 2024 में IMR का स्तर 24 रहा, जो 1971 की तुलना में पाँचवें हिस्से से भी कम है।
- विगत दस वर्षों में IMR में लगभग 38% की कमी आई।
- 2024 में छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक IMR (36) और मणिपुर में न्यूनतम (2) दर्ज किया गया।

शिशु मृत्यु दर को कम करने हेतु सरकारी पहल
- जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK): सभी गर्भवती महिलाओं एवं बीमार शिशुओं (एक वर्ष तक) को सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क प्रसव (सीज़ेरियन सहित) की सुविधा। इसमें निःशुल्क दवाएँ, उपभोग्य सामग्री, आहार, जाँच, परिवहन एवं रक्त आधान शामिल।
- प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA): गर्भवती महिलाओं को प्रत्येक माह की 9 तारीख को विशेषज्ञ/चिकित्सक द्वारा निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच।
- ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (VHSNDs): मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता तथा जागरूकता।
- प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य (RCH) पोर्टल: गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं की सेवाओं की सतत निगरानी हेतु वेब-सक्षम प्रणाली।
- माता एवं शिशु संरक्षण कार्ड तथा सुरक्षित मातृत्व पुस्तिका: गर्भवती महिलाओं को आहार, विश्राम, गर्भावस्था के खतरे के संकेत, लाभकारी योजनाएँ एवं संस्थागत प्रसव की जानकारी।
- मिशन इंद्रधनुष (2014): 90% से अधिक पूर्ण टीकाकरण कवरेज सुनिश्चित करने हेतु नियमित टीकाकरण सेवाओं को सुदृढ़ करना।
- पूर्ण टीकाकरण कवरेज 2015 में 62% से बढ़कर 2026 में 98.4% हुआ।
- राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK): 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों की 32 स्वास्थ्य स्थितियों (रोग, कमी, दोष एवं विकासात्मक विलंब) की स्क्रीनिंग।
- पोषण पुनर्वास केंद्र (NRCs): गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) एवं चिकित्सीय जटिलताओं वाले बच्चों का उपचार।
| क्या आप जानते हैं?भारत ने टीकाकरण के माध्यम से चेचक, पोलियो और मातृ एवं नवजात टिटनेस का उन्मूलन कर दिया है तथा अपना टीकाकरण कार्यक्रम निरंतर विस्तारित कर रहा है — हाल ही में 2026 में HPV एवं स्वदेशी Td टीके लॉन्च किए गए।सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रमों में से एक है, जो प्रतिवर्ष 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं और 2.54 करोड़ नवजात शिशुओं तक निःशुल्क पहुँचता है। |
Source: TH
Previous article
भारत के प्रस्तावित एंटी-डोपिंग कानून संशोधन
Next article
साइबर वॉरफेयर और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए चुनौती